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ग्रामीण सेवा शिविर में लाभार्थियों को मिले पट्टे, त्वरित काम होने से लोगों ने जताई खुशी

ग्रामीण सेवा शिविर में लाभार्थियों को मिले पट्टे, त्वरित काम होने से लोगों ने जताई खुशी
टोंक। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सुशासन की नई मिसाल देखी जा रही है। ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से भूमि सुधार, पट्टा वितरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी सरकारी सेवाएं सीधे ग्रामीणों के द्वार तक पहुँच रही हैं। यह अभियान सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ को खत्म कर मौके पर ही पारदर्शी और त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहा है। डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जनता की उम्मीदों को पूरा करने की यह शासन प्रणाली ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही है।दफ्तरों के चक्करों से मिली मुक्ति, सरकारी शिविर से निकली समाधान की युक्ति
गांव चांदसिंहपुरा में सालों से कई किसान अपने राजस्व रिकॉर्ड में गलतियों और आपसी बंटवारे को लेकर परेशान थे। 10 साल पुराना दर्द और मौके पर समाधान गांव के एक सीधे-सादे खातेदार किसान श्रीलाल पिछले 10 सालों से अपने नाम की एक गलती को सुधरवाने के लिए परेशान थे। नाम में त्रुटि होने के कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं और बैंकिंग कार्यों में रुकावट आ रही थी। जब उन्हें पता चला गाँव में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया जा रहा है, तो वह भी अपनी उम्मीदें लेकर वहाँ पहुँचे। शिविर में मौजूद राजस्व अधिकारियों ने उनके दस्तावेज़ों की तुरंत जाँच की। जो काम 10 साल से अटका हुआ था, वह इस शिविर में मौके पर ही शुद्ध कर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया। उन्होंने खुशी से कहा, आज 10 साल बाद मेरी समस्या का मौके पर ही समाधान हो गया। 15 बीघा ज़मीन का आपसी सहमति से बंटवारा इसी शिविर में गाँव की एक और बड़ी उलझन का अंत हुआ। कंचन देवी (पत्नी सीताराम), राजन्ति देवी पत्नी कन्हैया लाल और सीताराम पुत्र केसरा के बीच 15 बीघा ज़मीन के मालिकाना हक और विभाजन को लेकर लंबे समय से असहमति चल रही थी। शिविर प्रभारी, तहसीलदार साहब, गिरदावर, पटवारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी पक्षों को एक साथ बिठाया। अधिकारियों की समझाइश और सही मार्गदर्शन रंग लाया। देखते ही देखते, 15 बीघा ज़मीन का आपसी सहमति से विभाजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। सालों की कड़वाहट और विवाद पल भर में सुलझ गए। सभी लाभार्थी खातेदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। गाँव के लोगों ने अपनी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य सरकार का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।

अपनी जमीन पर मिला अपना हक घर के पटटे का सपना हुआ सच
तहसील निवाई में ग्राम पंचायत नोहटा में एक ही परिवार के चार भाई हनुमान सिंह, राजेन्द्र सिंह, डूंगर सिंह और भोपाल सिंह रहते थे। उनके पिता प्रहलाद सिंह ने जीवनभर मेहनत की थी, लेकिन अपने पुश्तैनी मकान का पट्टा हासिल नहीं कर पाए थे। पिता के जाने के बाद चारों भाई सालों से अपने ही आशियाने के कानूनी हक के लिए भटक रहे थे। पट्टा न होने के कारण वे अपने मकान की मरम्मत या उस पर कोई बैंक लोन नहीं ले पा रहे थे। चारों भाइयों ने मिलकर एक परिवादी के रूप में योजना के तहत आवेदन किया। संबंधित विभाग ने तुरंत उनके मामले पर संज्ञान लिया, ज़रूरी दस्तावेज़ों की जांच की और पूरी कानूनी प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करते हुए उनका पट्टा जारी कर दिया। जब चारों भाइयों के हाथ में अपने पुश्तैनी मकान का पट्टा आया, तो उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे। अब वे सिर्फ उस घर में रह नहीं रहे थे, बल्कि कानूनी रूप से उसके मालिक बन चुके थे। इस पट्टे ने उनके लिए तरक्की के नए रास्ते खोल दिए। अब वे इस पट्टे की मदद से किसी भी बैंक से लोन लेकर खुद का एक नया स्वरोजगार (बिजनेस) शुरू करने की ठानी, ताकि उनका परिवार एक बेहतर और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ सके।

शिविर में समाधान फखरू खां के आशियाने को मिली कानूनी पहचान
ग्राम पंचायत नोहटा के रहने वाले फखरू खां पुत्र झब्बू खां कई वर्षों से अपने पुश्तैनी घर में रह रहे थे। घर तो उनका था, लेकिन कागजों के अभाव में वे न तो उस पर कोई निर्माण कार्य के लिए लोन ले पा रहे थे और न ही कोई नया काम शुरू कर पा रहे थे। ग्रामीण सेवा शिविरश् का आयोजन हुआ, तो फखरू खां अपनी समस्या लेकर वहां पहुंचे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुना। विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए स्वामित्व योजना के अंतर्गत उनका पट्टा तैयार किया गया और शिविर में ही उन्हें सौंप दिया गया। कई वर्षों के बाद अपने पुश्तैनी मकान का पट्टा पाकर फखरू खां भावुक हो गए। उन्होंने सरकार का आभार जताते हुए कहा कि इस पट्टे ने उन्हें मकान का असली मालिक बनाया है। अब वे इस वैध दस्तावेज की मदद से किसी भी बैंक से आसानी से ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे।

रामदयाल जाट को मिला पुश्तैनी घर का कानूनी हक
ग्राम करिरिया ग्राम पंचायत नोहटा के निवासी रामदयाल जाट पुत्र श्री हीरालाल जाट के पास रहने को घर तो था, लेकिन उसका कोई पट्टा नहीं था। वर्षों से वे इस चिंता में रहते थे कि बिना सरकारी कागज के उनके आशियाने की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। बदलाव की शुरुआत तब हुई जब उनके इलाके में ग्रामीण सेवा शिविर लगा, तो रामदयाल जाट भी अपनी पुश्तैनी जमीन के कागजात लेकर पहुंचे। स्वामित्व योजना के तहत उनके मामले की तुरंत समीक्षा की गई। पंचायती राज विभाग ने बिना किसी देरी के उनके पट्टे की कार्यवाही पूरी की और उन्हें पट्टा जारी कर दिया। पट्टा मिलने के बाद रामदयाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि इतने सालों बाद आज उन्हें अपने घर का मालिकाना हक मिला। इस पट्टे की बदौलत अब वे भविष्य में किसी भी बैंक से वित्तीय सहायता लेकर अपने काम को आगे बढ़ा सकेंगे और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

भंवर लाल गुर्जर की सालों पुरानी चिंता हुई दूर
ग्राम करिरिया के भंवर लाल गुर्जर पुत्र कंचन लाल गुर्जर के लिए अपने पुश्तैनी मकान का पट्टा हासिल करना एक बड़ा सपना था। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के डर से वे इसके लिए आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। बदलाव की शुरुआत हुई जब प्रशासन खुद ग्रामीण सेवा शिविर 2026 के माध्यम से उनके द्वार तक पहुंचा, उन्होंने शिविर में स्वामित्व योजना के अंतर्गत आवेदन किया। विभाग के अधिकारियों ने मौके पर ही पारदर्शी तरीके से कार्यवाही करते हुए उनका पट्टा जारी कर दिया। वर्षों का इंतजार कुछ ही घंटों में खत्म हो गया। भंवर लाल गुर्जर ने बताया कि पुश्तैनी पट्टा मिलने से उनके मकान को कानूनी सुरक्षा मिल गई है। अब वे पूरी तरह निश्चिंत हैं और इस पट्टे का उपयोग बैंक से लोन लेकर कोई नया स्वरोजगार शुरु करेंगे।

हेमराज और रामचरण के परिवार को मिला तरक्की का आधार
ग्राम करिरिया के दो भाई, हेमराज और रामचरण पुत्र हजारी लाल जाट अपने पुश्तैनी मकान के पट्टे के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। उपखण्ड निवाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर इन दोनों भाइयों के लिए मददगार साबित हुआ। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने स्वामित्व योजना के तहत उनके आवेदन पर तुरंत एक्शन लिया और सारी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करके पट्टा उनके हाथों में सौंप दिया। संयुक्त रूप से पट्टा प्राप्त करने के बाद दोनों भाई बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि इस पट्टे ने उनके परिवार को एक बड़ा संबल दिया है और मकान का मालिकाना हक तय कर दिया है। अब वे इस पट्टे की मदद से बैंक से व्यापारिक लोन लेकर अपने नए काम की शुरुआत कर सकेंगे

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