जैन साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर उठी मांग, केंद्र व राज्य सरकार से ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की अपील
मालपुरा (टोंक)। हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा में हुई सड़क दुर्घटना में दो जैन साध्वियों के आकस्मिक निधन के बाद जैन समाज में गहरा आक्रोश और शोक व्याप्त है। इसी क्रम में जैन समाज एवं अहिंसा प्रेमी नागरिकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित ज्ञापन एसडीएम कपिल शर्मा के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया कि रीवा में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना में परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की शिष्याएं आर्यिका मां श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका मां उपशममति माताजी का समाधि-मरण हो गया, जिससे देशभर का जैन समाज मर्माहत है।
ज्ञापन में कहा गया कि जैन साधु-साध्वी आजीवन नंगे पैर पदयात्रा करते हुए धर्म, शांति एवं अहिंसा का संदेश देते हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों एवं मुख्य मार्गों पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण उनके साथ दुर्घटनाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में संतों की सुरक्षा केवल समाज ही नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की भी जिम्मेदारी है।
ज्ञापन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार से संपूर्ण देश और प्रदेश में व्यापक ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग की गई। साथ ही पदविहार के दौरान पुलिस एस्कॉर्ट एवं होमगार्ड उपलब्ध कराने, थाना क्षेत्रों के बीच समन्वय बनाए रखने, हाईवे पर सुरक्षित लेन एवं बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने तथा रीवा दुर्घटना सहित पूर्व की घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में कहा गया कि जैन साधु-संत देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।
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