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डिग्गी में ‘फ्री एसी’ का नया खेल! ऑफरों की चमक में छिपे सवाल, उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत

डिग्गी में ‘फ्री एसी’ का नया खेल! ऑफरों की चमक में छिपे सवाल, उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत 
डिग्गी/मालपुरा (टोंक)। टोंक जिले के डिग्गी क्षेत्र में उप तहसील के पास प्रस्तावित कॉलोनी एक बार फिर सुर्खियों में है। पहले “एक प्लॉट पर एलईडी फ्री” और अब “एक प्लॉट पर एक एसी फ्री” जैसे लगातार बदलते ऑफरों ने इस परियोजना को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 30 अप्रैल 2026 तक सीमित बुकिंग का दावा कर लोगों को तेजी से निवेश के लिए आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन इन ऑफरों की चमक के पीछे अब कई गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
यह खबर किसी व्यक्ति या परियोजना विशेष पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की जा रही है। लगातार बदलते ऑफरों से यह संकेत मिलता है कि निवेश से पहले सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की आर्थिक हानि से बचा जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना में रेरा (RERA) नियमों की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। अब तक रेरा पंजीकरण, भूमि रूपांतरण, नक्शा स्वीकृति और अन्य जरूरी अनुमतियों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। प्राप्त जानकारी व नियमों के अनुसार 500 वर्ग मीटर (लगभग 0.2–0.25 बीघा) से बड़ी या 8 से अधिक भूखंड/मकान वाली किसी भी परियोजना का पंजीकरण अनिवार्य होता है। बिना पंजीकरण के किसी भी परियोजना का प्रचार या बिक्री करना गैरकानूनी माना जाता है।
रेरा के तहत उपभोक्ताओं को कई बुनियादी अधिकार और सुविधाएं सुनिश्चित करना जरूरी होता है। इनमें पक्की सड़कें, बिजली, पेयजल, सीवरेज/नाली व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही खरीदार को परियोजना की पूरी पारदर्शी जानकारी, स्वीकृत नक्शा, भूमि की कानूनी स्थिति, तय समय पर कब्जा और देरी होने पर मुआवजा पाने का अधिकार भी दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी ने पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र पर चिंता बढ़ा दी है। न्यायालय ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी (रेरा) के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है और घर खरीदारों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है।
ऐसे परिदृश्य में डिग्गी की यह कॉलोनी भी सवालों के घेरे में है। “फ्री एलईडी” से “फ्री एसी” तक का बदलाव यह बताता है कि आकर्षक ऑफरों के पीछे छिपी वास्तविक स्थिति को समझना बेहद जरूरी है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे किसी भी भूखंड या मकान में निवेश करने से पहले रेरा पंजीकरण की जांच करें, सभी दस्तावेजों को सत्यापित करें और केवल ऑफरों के आधार पर निर्णय न लें। जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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