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अवैध कॉलोनियों के सरगना बौखलाए — सच उजागर करने वाले पत्रकारों को दी धमकी, अब मालपुरा में मचा बवाल!

अवैध कॉलोनियों के सरगना बौखलाए — सच उजागर करने वाले पत्रकारों को दी धमकी, अब मालपुरा में मचा बवाल!
मालपुरा (टोंक)।
मालपुरा में अवैध कॉलोनियों के खेल का पर्दाफाश करने वाली खबरें सामने आते ही कॉलोनाइज़रों में हड़कंप मच गया है। रेरा के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर कॉलोनियां काटने वाले अब सच दिखाने वाले पत्रकारों को धमकाने पर उतर आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई पत्रकारों को “देख लेंगे” और “अच्छा नहीं होगा” जैसी खुली धमकियां दी जा रही हैं। इस शर्मनाक हरकत से पत्रकार समुदाय में गहरा आक्रोश है। खबर प्रकाशित होने के बाद कॉलोनाइज़रों की बौखलाहट साफ झलक रही है — जो कल तक अवैध ज़मीनों पर कॉलोनियां बसा रहे थे, आज सच्चाई पर परदा डालने में जुट गए हैं।
इस बीच, एक बार फिर राजस्थान में पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग तेज हो गई है। कुछ माह पूर्व भी मालपुरा के पत्रकारों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हुई थी। अब इन धमकियों के बाद यह मांग और प्रबल हो गई है कि सरकार को पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने होंगे।
मालपुरा न्यूज पोर्टल एसोसिएशन ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने एकजुट होकर निर्णय लिया है कि इस मामले की शिकायत रेरा निदेशक और पुलिस प्रशासन से की जाएगी ताकि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
एसोसिएशन ने तीखे शब्दों में कहा —
जो लोग अवैध जमीनों पर कॉलोनियां बसाते हैं, अब वही सच्चाई की ज़मीन हिलाने निकले हैं। लेकिन पत्रकारिता को धमकियों से नहीं दबाया जा सकता। मालपुरा की जनता सब जानती है और सच अब रुकेगा नहीं।
इधर, न्यूज पोर्टल्स द्वारा लगातार रेरा के नियमों को लेकर खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद जनता में रेरा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब लोग कॉलोनाइज़र से उनके प्रोजेक्ट्स को लेकर स्पष्टीकरण मांगने लगे हैं। आम नागरिकों को भी समझ आने लगा है कि कॉलोनी खरीदने से पहले रेरा अनुमोदन अनिवार्य है।
इस बीच, अवैध कॉलोनियों से ठगे गए कई पीड़ितों ने पत्रकारों का साथ देने की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई अब सिर्फ पत्रकारों की नहीं, बल्कि आमजन के हक की लड़ाई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पत्रकारों को धमकाना कानूनी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सीधा उल्लंघन है। पत्रकार समाज ने भी चेतावनी दी है —
सच लिखना हमारा धर्म है, और सच छापना अपराध नहीं! इसके लिए चाहे कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे।
अब सवाल यह है —
क्या मालपुरा में सच्चाई दिखाने की कीमत धमकी बन गई है?
क्या कानून के रखवाले अब भी चुप रहेंगे, या इस बार सच बोलने वालों के साथ खड़े होंगे?

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