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आमजन शीत-घात को लेकर सतर्क रहें
जिला प्रशासन ने जन समुदाय को शीतलहर (शीतघात) से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की
टोंक, 30 दिसंबर। जिले में शीतघात के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने जनसमुदाय के लिए शीतलहर एवं शीत-घात के दौरान क्या करें, क्या न करें के निर्देष जारी किए है।
शीत-घात से बचाव से लिए क्या करें और क्या न करें
शीत-घात से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के लिए रेडियो, टीवी, समाचार पत्र जैसे सभी मीडिया प्रकाशन का ध्यान रखें ताकि यह पता चल सके कि आगामी दिनों में शीत लहर की संभावना है या नहीं। सर्दियों लिए पर्याप्त कपड़ों का स्टॉक करें। कपड़ों की कई परतें अधिक सहायक होती है। आपातकालीन आपूर्ति जैसे भोजन, पानी, ईंधन, बैटरी, चार्जर, आपातकालीन प्रकाश, और साधारण दवाएं तैयार रखें। घर में ठंडी हवा के प्रवेश रोकने के लिए दरवाजों तथा खिड़कियों को ठीक से बंद रखे। फ्लू, जुखाम (नजला) जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना आमतौर पर ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होती है। इस तरह के लक्षणों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतें तथा चिकित्सक से परामर्श करें।
शीत-घात के दौरान
मौसम की जानकारी तथा आपातकालीन प्रक्रिया की जानकारी का बारीकी से पालन करें एवं शासकीय एजेंसियों की सलाह के अनुसार कार्य करें। जितना हो सके घर के अंदर रहें और ठंडी हवा, बारिश, बर्फ के संपर्क को रोकने के लिए कम यात्रा करें। एक परत वाले कपडे की जगह ढीली फिटिंग वाले परतदार हल्के कपडे, हवा रोधी, सूती का बाहरी आवरण तथा गर्म ऊनी दस्ताने, भीतरी कपडे पहने। तंग कपडे खून के बहाव को रोकते हैं इनसे बचें। शरीर की गर्मी बनाये रखने के लिए अपने सिर, गर्दन, हाथ और पैर की उँगलियों को पर्याप्त रूप से ढके। अपने फेफड़ों को बचाने के लिए मुँह तथा नाक ढक कर रखें। कोविड-19 तथा अन्य संक्रमण से बचने लिए बाहर जाते समय मास्क का उपयोग करें। शरीर कि गर्मी बचाये रखने के लिए टोपी, हैट, मफलर तथा आवरण युक्त एवं जलरोधी जूतों का प्रयोग करें। सिर को ढके क्योंकि सिर के उपरी सतह से शरीर की गर्मी की हानि होती है।
स्वास्थ्य वर्धक भोजन करें। पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पीएं, इससे ठंड से लड़ने के लिए शरीर की गर्मी बनी रहेगी। तेल, पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज करें। बुजुर्ग लोगों, नवजात शिशुओं तथा बच्चों का ध्यान रखें एवं ऐसे पड़ोसी जो अकेले रहते है विशेषकर बुजुर्ग लोगो का हाल चाल पूछते रहें। आवश्यकता अनुसार जरूरी सामग्री का भंडारण करें। जरूरी मात्रा में पानी भी रखें, पाइप में पानी जम सकता है। आवश्यकता अनुसार रूम हीटर का उपयोग कमरे के अंदर ही करें। रूम हीटर के प्रयोग के दौरान पर्याप्त हवा निकासी का प्रबंध रखें। कमरों को गर्म करने के लिए कोयले का प्रयोग न करें। अगर कोयले तथा लकड़ी को जलाना आवश्यक है तो उचित चिमनी का प्रयोग करें। बंद कमरों में कोयले को जलाना खतरनाक हो सकता है। क्योकि यह कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस पैदा करती है जो किसी की जान भी ले सकती है। गैर औद्योगिक भवनों में गर्मी के बचाव के लिए गाइडलाइन अनुसार रोधन का उपयोग करें। ज्यादा समय तक ठंड के संपर्क में न रहें। शराब न पीएं। यह शरीर की गर्माहट को कम करती है, यह खून की नसों को पतला कर देती है विशेषकर हाथों से जिसमे हाईपोथर्मिया का खतरा बढ जाता है।
शीत ऋतु में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मालिश न करें यह त्वचा को और नुकसान पहुंचा सकती है। अचेतावस्था में किसी को कोई तरल पदार्थ न दें। शीत लहर के संपर्क में आने पर शीत से प्रभावित अंगों के लक्षणों जैसे कि संवेदनशून्यता सफेद अथवा पीले पड़े हाथ एवं पैरों की उंगलियां कान की लौ तथा नाक की उपरी सतह का ध्यान रखें। शीत लहर के अत्यधिक प्रभाव से त्वचा पीली, सख्त एवं संवेदनशून्य तथा लाल फफोले पड़ सकते है। यह एक गंभीर स्थिति होती है जिसे गैंगरीन भी कहा जाता है। यह अपरिवर्तनीय होती है। अतः शीत लहर के पहले लक्षण पर ही चिकित्सक की सलाह लें। तब तक अंगों को तत्काल गर्म करने का प्रयास करें। ज्यादा गर्मी से इन अंगों के जलने की संभावना होती है। शीत से प्रभावित अंगों को गुनगुने पानी (गर्म पानी नही) से इलाज करें। इसका तापमान इतना रखें की यह शरीर के अन्य हिस्से के लिए आरामदायक हो।
कपकपी को नजर अंदाज ना करें। यह शरीर से गर्मी के हास का पहला संकेत है कि तत्काल गर्मी प्राप्त करने लिए भवन के अंदर चले जाएं। प्रभावित व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाएँ तथा उनके गीले तथा ठंडे कपडों को बदलें। उसको हीटर अथवा आग के आसपास रखें। उसको गर्म पेय पदार्थ दें जिससे शरीर में गर्माहट बनाए रखने में मदद मिले। शरीर में गर्मी के ह्रास से कंपकंपी, बोलने में दिक्कत, अनिंद्रा, मांसपेशियों में अकड़न, सांस लेने में दिक्कत, निश्चेतन की अवस्था हो सकती है। प्राथमिक चिकित्सा के लिए एनडीएमए के फास्ट ऐप का अनुसरण करें।