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जिले के समस्त पशु चिकित्सक रोगी पशुओं का बेहतर उपचार करना सुनिश्चित करें-डॉ. छोटू लाल बैरवा

जिले के समस्त पशु चिकित्सक रोगी पशुओं का बेहतर उपचार करना सुनिश्चित करें-डॉ. छोटू लाल बैरवा
संयुक्त निदेशक ने किया पशु चिकित्सालय भरनी का औचक निरीक्षण, पशुधन सहायकों को दिए टीकाकरण करने के निर्देश
टोंक, 19 जुलाई। जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा एवं विभागीय उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. छोटू लाल बैरवा ने शुक्रवार को जिले के प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय भरनी का औचक निरीक्षण किया। संयुक्त निदेशक ने पशुचिकित्सालय के प्रभारी डॉ. आलोक गौड़ एवं पशुधन सहायक गजेंद्र यादव एवं मुकेश कसाना समेत अन्य कार्मिकों को निर्देश दिए कि पशुपालक को किसी भी समस्या के लिए परेशान नहीं होना पड़े, चिकित्सक एवं पशुधन सहायक वर्षा जनित बीमारियों के बचाव के लिए नियमित टीकाकरण के साथ-साथ चिकित्सालय में आपात स्थिति में आने वाले पशुओं का बेहतर उपचार करें। संयुक्त निदेशक डॉ. बैरवा ने पशुचिकित्सालय का निरीक्षण करते हुए अपने पशुओं का उपचार कराने आए पशुपालकों से, मिल रहे उपचार की जानकारी ली एवं चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने चिकित्सालय के पशु रोगी पंजीकरण कक्ष, औषधि वितरण एवं औषधि भंडार का भी निरीक्षण किया। संयुक्त निदेशक ने बैठक लेकर चिकित्सालय प्रभारी डॉ आलोक गौड़ को निर्देश दिए कि हॉस्पिटल के समस्त चिकित्सक राज्य सरकार की मंशा के अनुसार प्रो-एक्टिव एप्रोच एवं अलर्ट मोड़ पर रहकर कार्य करते हुए रोगी पशुओं का उपचार करना सुनिश्चित करें, इसमें चिकित्सकों की किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कार्मिक बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़े
संयुक्त निदेशक ने चिकित्सालय प्रभारी डॉ. गौड़ को कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य पूर्ण करने, मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महा अभियान 2024 के तहत वृक्ष लगाने, कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने के लिए पाबंद किया।
संयुक्त निदेशक डॉ. छोटू लाल बैरवा ने बताया कि पशुपालकों के पशुओं को वर्षा जनित रोगों से बचाने एवं उनकी उचित देखभाल करने के लिए फील्ड में जाकर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को पशु चिकित्सालयों की आपातकालीन व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लगातार निर्देश प्रदान किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य है कि सभी कार्मिक समय पर चिकित्सालय आएं और रोगी पशुपालकों के अमूल्य पशुओं का उपचार सेवा भाव के साथ करें। उन्होंने कहा कि पशु औषधि के अभाव में किसी भी पशुपालक को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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