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फर्जी पट्टा कांडः पट्टा निरस्त, अध्यक्ष को नोटिस… अब जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई ?

मालपुरा (टोंक)। नगर पालिका मालपुरा का फर्जी पट्टा प्रकरण अब सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त शिकायत पर उप निदेशक (क्षेत्रीय), स्थानीय निकाय विभाग अजमेर द्वारा की गई जांच में भूखण्ड संख्या 150 पर विद्या देवी पत्नी जयप्रकाश सिंधी को 13 जनवरी 2023 को जारी पट्टा संख्या 27 को पूरी तरह नियम विरुद्ध करार दिया गया था। स्वायत्त शासन विभाग ने 10 अक्टूबर 2025 को अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका मालपुरा को पत्र जारी कर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 73 (बी) के तहत उक्त पट्टा तत्काल निरस्त करने और कार्रवाई रिपोर्ट भेजने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। आदेश की पालना में पट्टा निरस्त तो कर दिया गया, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे प्रशासन को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया। अब स्वायत्त शासन विभाग द्वारा तत्कालीन पालिकाध्यक्ष आशा नामा को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाना एक बड़ा प्रशासनिक एक्शन माना जा रहा है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि विभाग अब सिर्फ फाइलें बंद करने नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बढ़ रहा है। लेकिन इस कथित “एक्शन” के बीच सबसे बड़े सवाल अब भी हवा में हैं- क्या उस प्रार्थी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होगी, जिसने तथ्यों को छुपाकर फर्जी तरीके से पट्टा हासिल किया? क्या नियम विरुद्ध पट्टा जारी करने में शामिल रहे पालिका अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आएंगे, या फिर पूरा ठीकरा सिर्फ अध्यक्ष पर फोड़ा जाएगा? और क्या नगर पालिका में पूर्व में जारी अन्य पट्टों की भी गहन जांच होगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? फर्जी पट्टा निरस्त होना महज शुरुआत है, असली कसौटी अब जवाबदेही की है। जब तक फर्जीवाड़े के हर जिम्मेदार पर ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह पूरा मामला जनता की नजर में “कार्रवाई नहीं, दिखावा” ही माना जाएगा। नगर पालिका प्रशासन की पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही पर यह प्रकरण गहरे और गंभीर सवालिया निशान छोड़ गया है।
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