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स्पीड पोस्ट से पहुँचा सनसनीखेज आरोपपत्र, पालिका अध्यक्ष – ईओ – बाबू पर 65 लाख के राजकोषीय नुकसान व घूसखोरी के गंभीर आरोप

स्पीड पोस्ट से पहुँचा सनसनीखेज आरोपपत्र,
पालिका अध्यक्ष – ईओ – बाबू पर 65 लाख के राजकोषीय नुकसान व घूसखोरी के गंभीर आरोप
स्पीड पोस्ट आरोपपत्र में कितना सच कितना झूठ ?
मालपुरा (टोंक)।

शुक्रवार को स्पीड पोस्ट के जरिए कुछ पत्रकारों को प्राप्त एक लिफाफे ने मालपुरा नगर पालिका प्रशासन में हड़कंप मचा दिया। लिफाफे के भीतर मौजूद आरोपपत्र में वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी (ईओ) तथा पालिका बाबू निहालचंद जैन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और घूसखोरी के आरोप लगाए गए हैं।

आरोपपत्र के अनुसार दूदू रोड स्थित राधे विहार कॉलोनी को कृषि भूमि से आवासीय कॉलोनी में नियमन करने की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां की गईं। पत्र में दावा किया गया है कि नियमन प्रक्रिया के तहत करीब 95 लाख रुपये नगर पालिका में जमा होने चाहिए थे, लेकिन कथित मिलीभगत के चलते 16 जनवरी 2026 को केवल 30 लाख रुपये ही जमा कराए गए, जिससे करीब 65 लाख रुपये के राजकोषीय नुकसान का आरोप लगाया गया है।
पत्र में यह भी आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा उक्त कॉलोनी में अपने एक रिश्तेदार के नाम से फर्जी तरीके से पट्टा बनाया जा रहा है। इसके साथ ही घूस के रूप में लाखों रुपये लेने का भी दावा किया गया है। आरोपपत्र में यह भी उल्लेख है कि पालिका बाबू निहालचंद जैन एवं अधिशासी अधिकारी द्वारा कृषि भूमि से आवासीय कॉलोनी के पट्टे बनवाने एवं नियमन प्रक्रिया में मोटी रिश्वत ली जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपपत्र में एसओजी, एसीबी एवं सीआईडी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, मुख्य सचिव, स्वायत्त शासन विभाग जयपुर, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जयपुर सहित पूर्व पालिकाध्यक्ष आशा नामा एवं पालिका उपाध्यक्ष पवन मेंदवास्या को भी भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
इधर, पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर पालिका अधिशासी अधिकारी रामजीत चौधरी ने बताया कि इस प्रकार का कोई पत्र फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
पूर्व पालिकाध्यक्ष आशा नामा ने बताया कि वे इन दिनों जयपुर में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं और उन्हें मालपुरा स्थित आवास पर इस तरह का पत्र मिलने की सूचना मिली है।

वहीं पालिका उपाध्यक्ष पवन मेंदवास्या ने भी पुष्टि की कि उन्हें भी स्पीड पोस्ट के माध्यम से इसी तरह का पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

आरोपपत्र लिखने वाले ने अपना नाम अशोक कुमार शर्मा निवासी रेलवे स्टेशन, मालपुरा बताया है। पत्र में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितना झूठ, यह फिलहाल जांच का विषय बना हुआ है। अभी तक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
हालांकि, पत्र में जिस तरह से तिथियों, राशि और प्रक्रियाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है, उसने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो क्या निष्पक्ष जांच होगी या मामला फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?
और यदि आरोप गलत हैं, तो फिर यह पत्र किस मंशा से और किसके इशारे पर भेजा गया?
फिलहाल स्पीड पोस्ट से पहुँचा यह आरोपपत्र नगर पालिका प्रशासन को कटघरे में खड़ा करता नजर आ रहा है। अब पूरे शहर की निगाहें प्रशासनिक जवाब, जनप्रतिनिधियों की सफाई और संभावित जांच की घोषणा पर टिकी हुई हैं।
सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

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