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भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और बेखौफ भ्रष्ट अधिकारी

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और बेखौफ भ्रष्ट अधिकारी

मालपुरा (टोंक)। करप्शन पर अंकुश लगाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) लगातार छापेमारी करने के साथ ही गांव-कस्बों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा कर रहे हैं। वे जोर देकर कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मोदी सरकार भी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से अपनाने पर बल दे रही है। और देश के अन्नदाता को लेकर तो केंद्र सरकार विशेष सजग है। लेकिन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का कितना असर है, यह तो भ्रष्टाचार विभाग के आंकड़े ही बता पाएंगे। जीरो टॉलरेंस नीति के बाद भी अधिकारी, कर्मचारियों से लेकर सरपंच और पटवारी तक किसी पर भी इन बातों का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। वे जरूरतमंद से खुलकर डिमांड कर लेते हैं। अभी हाल ही का मामला है, उपखण्ड के एक महिला पटवारी के पास एक पीड़ित किसान विरासत सजरा बनवाने और नामांतरण खुलवाने के लिए करीब 3-4 महीनों से लगातार चक्कर काट रहा था। लेकिन महिला पटवारी व दलाल ने पीड़ित किसान से 10 हजार रुपये की डिमांड कर डाली। डिमांड पूरी नहीं करने पर नामांतरण नही खोला जा रहा था। लेकिन जैसे ही महिला पटवारी और दलाल का वीडियो सामने आया तो पटवारी और दलाल के हाथ पांव फूल गए। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी की अगर बात करे तो तुरंत प्रभाव से पीड़ित किसान से पटवारी ने सम्पर्क साधकर 7 – 8 दिन पहले नामान्तरण खोल दिया गया। सरकार व सम्बन्धित विभाग को ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नही होने से राज्य सरकार की भ्रष्टाचार जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल खड़े होते हैं।

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