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डिग्गी की नकली दूध फैक्ट्री बंद, लेकिन केमिकल सप्लाई की कड़ी अब भी रहस्य!
फैक्ट्री पर कार्रवाई के बाद भी खत्म नहीं हुआ शक, ग्रामीण इलाकों में फिर सक्रिय होने की चर्चा
डिग्गी (टोंक)।
डिग्गी में कुछ समय पहले पकड़ी गई नकली दूध बनाने की फैक्ट्री ने देशभर की मीडिया में सुर्खियाँ बटोरी थीं। प्रशासन की कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को बंद कर दिया गया, लेकिन इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल अब भी अनुत्तरित है। आखिर नकली दूध बनाने में इस्तेमाल होने वाला यूरिया और अन्य केमिकल उस फैक्ट्री तक पहुँच कहाँ से रहे थे?
कार्रवाई के दौरान मौके से भारी मात्रा में नकली दूध, केमिकल और उपकरण बरामद किए गए थे। उस समय अधिकारियों ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और सप्लाई चेन तक जांच पहुँचाने की बात कही थी। मगर कई दिन गुजर जाने के बावजूद केमिकल सप्लाई की कड़ी पर अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री बंद होने के बाद भी नकली दूध का अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। चर्चा है कि कुछ लोग ग्रामीण क्षेत्रों में बॉयलर और अन्य उपकरणों की मदद से नकली मावा और दूध तैयार कर बाजार में खपाने की कोशिश कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि नकली दूध बनाने में उपयोग होने वाले यूरिया, डिटर्जेंट और अन्य रसायनों की सप्लाई का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। यदि प्रशासन इस सप्लाई चेन की गहराई से जांच करे तो इस काले कारोबार से जुड़े कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
सूत्र यह भी बताते हैं कि उपखंड क्षेत्र के केरिया गांव में भी नकली दूध बनाने के कुछ संभावित संयंत्र होने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन गंभीरता से जांच करे तो इस पूरे नेटवर्क की कई परतें खुल सकती हैं।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि नकली दूध का यह धंधा केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन केवल फैक्ट्री बंद करने तक सीमित न रहे, बल्कि केमिकल सप्लाई से लेकर बाजार में खपत तक पूरे नेटवर्क की सख्त जांच करे, ताकि इस खतरनाक कारोबार पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके।
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