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मुंह में राम, बगल में छुरी आम सूचना का नया खेल

मुंह में राम, बगल में छुरी आम सूचना का नया खेल

हमारे शहर की पालिका भी कमाल की है। यहां नियम इतने ईमानदारी से निभाए जाते हैं कि नियम भी कभी-कभी खुद हैरान हो जाते होंगे।

अब देखिए ना… नियम कहता है कि अगर किसी जमीन का उपयोग बदलना है तो “आम सूचना” अखबार में प्रकाशित करो, ताकि जिसे आपत्ति हो वह समय पर आपत्ति दर्ज करवा सके।

पालिका ने नियम का अक्षरशः पालन किया। सूचना अखबार में छप भी गई। बस एक छोटा-सा चमत्कार हो गया जिस दिन सूचना छपी, उसी दिन शहर में अखबार ही नहीं आया। अब इसे संयोग कहें, प्रयोग कहें या प्रशासन का “स्मार्ट मैनेजमेंट”, यह समझना आम जनता के बस की बात नहीं है।

शहर में लोग कहते हैं कि अधिकारी साहब बहुत ईमानदार हैं। इतने ईमानदार कि अगर ईमानदारी का ओलंपिक हो जाए तो शायद गोल्ड मेडल लेकर ही लौटें। लेकिन जनता का दिमाग थोड़ा कमजोर है, इसलिए वह समझ नहीं पा रही कि यह कैसी ईमानदारी है जिसमें अवैध कॉलोनियां तो स्पीड में बस रही हैं और नियम बेचारे बैलगाड़ी में पीछे-पीछे दौड़ रहे हैं।

कॉलोनाइजर भी बड़े खुश हैं। कहते हैं- “पालिका में ऐसे अधिकारी रोज-रोज थोड़े ही आते हैं।”

अब शहर में चर्चा है कि शायद अधिकारी जी ने मिंटो फ्रेश का नया फ्लेवर खा लिया है। जिसका नया नारा कुछ ऐसा होगा- “मिंटो फ्रेश खाओ…

और हर सवाल पर मुस्कुराओ… जुबान पर लगाम लगाओ…”

अधिकारी जी की जुबान अगर गलती से खुल भी जाए तो एक ही रटा रटाया जवाब ” सब कुछ नियमानुसार किया गया है।”

उधर कॉलोनाइजर भी बड़े खुश हैं। उन्हें अब समझ आ गया है कि शहर में प्लॉट काटने से पहले नक्शा बनाना जरूरी नहीं… बस समय और सिस्टम का सही चुनाव होना चाहिए।

जनता अब धीरे-धीरे समझने लगी है कि हमारे शहर में “आम सूचना” का मतलब शायद यह है – “आम जनता के लिए नहीं, खास लोगों के काम की सूचना ।” अब हालात ऐसे हो गए हैं जैसे रामायण का कोई नया एपिसोड चल रहा हो। मैदान में इंद्रजीत खुलेआम घूम रहा है और राम की सेना फाइलों में रास्ता ढूंढ रही है।

शहर के बुजुर्ग तो अब मजाक में कहते हैं- “लगता है इस शहर को अब किसी लक्ष्मण जैसे तपस्वी की जरूरत पड़ेगी… जो तीर चलाने से पहले यह न पूछे कि ‘नियम क्या कहते हैं’, बल्कि यह पूछे कि ‘सच क्या कहता है’।”

फिलहाल तो शहर की जनता यही सोच रही है- “आम सूचना आखिर आम जनता तक कब पहुंचेगी… या फिर हर बार रास्ते में ही ‘खास’ बन जाएगी?” (व्यंग्य लेख – लेखक की कलम से)

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