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फर्जी पट्टों से जुड़ा मामलाः नगर पालिका प्रशासन पर खड़े हुए गंभीर सवाल
मालपुरा (टोंक)। नगर पालिका मालपुरा में कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए फर्जी पट्टों के मामले ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रकरण में स्वायत्त शासन विभाग द्वारा राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39(1) के तहत तत्कालीन पालिका अध्यक्ष आशा नामा को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। उप निदेशक (क्षेत्रीय), स्थानीय निकाय विभाग, अजमेर द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया नियमों की अनदेखी सामने आने का दावा किया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार खांचा भूमि आवंटन के एक प्रकरण में नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और सीधे 136.11 वर्गगज का पट्टा जारी कर दिया गया, जबकि प्रावधान यह है कि खांचा भूमि का पृथक आवंटन कर उसे आवेदक की स्वामित्व भूमि के साथ जोड़ते हुए अनुपूरक पट्टा जारी किया जाए। इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि नियमों के विपरीत पट्टे जारी हुए तो जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी और क्या ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में खामियां थीं तो उनकी जांच-पड़ताल क्यों नहीं की गई और बिना पूर्ण प्रक्रिया के पट्टा जारी कैसे हो गया। स्वायत्त शासन विभाग ने नोटिस में 15 दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। समय पर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई और अधिनियम के तहत कठोर कदम उठाए जाने की चेतावनी भी दी गई है। फर्जी पट्टों के इस प्रकरण ने नगर पालिका प्रशासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लग पाया जाएगा।
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