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“कुर्सी की जड़ें गहरी… संगठन की हालत पतली !”

“कुर्सी की जड़ें गहरी… संगठन की हालत पतली !” शहर की राजनीति में इन दिनों ऐसा तूफान उठा है कि तिरंगी पार्टी के दफ्तर में अब फुसफुसाहट भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगी है। बात धीमी होती है, लेकिन असर ऐसा कि दीवारें भी अब कान नहीं, वाई-फाई लगाकर सुन रही …

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“500 रुपये-स्कूल के लिए नियम, गरीब के लिए सजा”

“500 रुपये-स्कूल के लिए नियम, गरीब के लिए सजा” मेरे शहर के एक नामी मॉडर्न स्कूल का एनुअल डे इस बार इतना “शानदार” रहा कि देखने वालों की आंखों में कभी चमक आई… तो कभी हल्की सी चुभन भी। मंच पर नन्हे-मुन्ने बच्चे तिरंगा लहराते हुए जब देशभक्ति गीतों पर …

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मुंह में राम, बगल में छुरी आम सूचना का नया खेल

मुंह में राम, बगल में छुरी आम सूचना का नया खेल हमारे शहर की पालिका भी कमाल की है। यहां नियम इतने ईमानदारी से निभाए जाते हैं कि नियम भी कभी-कभी खुद हैरान हो जाते होंगे। अब देखिए ना… नियम कहता है कि अगर किसी जमीन का उपयोग बदलना है …

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खतरे में कौन हैं? (एक तीखा व्यंग्य) आजकल हमारे शहर में एक नया मौसम चल रहा है- न बरसात का, न बेरोज़गारी का, न महंगाई का… सीधे खतरे का मौसम । सुबह अख़बार खोलो- खतरा। शाम को चाय की चुस्की लो- खतरा। रात को मोबाइल स्क्रॉल करो- खतरा। और सबसे …

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“मेरे शहर का हाल-ए-गज़ब”

“मेरे शहर का हाल-ए-गज़ब” हमारे शहर में सब कुछ है- बिजली है, मगर कभी आती है, कभी जाती है… ठीक वैसे ही जैसे नेताओं के वादे । सड़कें भी हैं, लेकिन गूगल मैप भी उन्हें ढूँढने में फेल हो जाता है। गड्ढों ने बाकायदा यूनियन बना रखी है- “गड्ढा विकास …

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“होइहि सोइ जो राम रचि राखा।”… (व्यंग्य लेख)

“होइहि सोइ जो राम रचि राखा।”… (व्यंग्य लेख) अबकी बार शहर में त्रिलोकीनाथ की यात्रा इस बार ऐसी भव्यता के साथ निकली कि लगता था सड़कों पर गड्ढों के बजाय गुलाब के कोमल पुष्प बिखेर दिए गए हो। पहली बार बिछी लाल-हरी दरी पट्टियाँ गुलाब के फूल के होने का …

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“पटरी रहित समझौता एक्सप्रेस भाग – 2… अदालत का लाल सिग्नल

“पटरी रहित समझौता एक्सप्रेस भाग – 2…अदालत का लाल सिग्नल मालजी की नगरी में फिल्मों की तरह हर कहानी का सीक्वल बनता है। बाहुबली और पुष्पा को भूल जाइए, यहां की पटरी रहित समझौता एक्सप्रेस का भी भाग 2 आ ही गया। अरे भाई, ये कोई आम गाड़ी थोड़े ही …

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“पटरी रहित समझौता एक्सप्रेस”

“पटरी रहित समझौता एक्सप्रेस” मालजी की नगरी में चमत्कार होना अब कोई खबर नहीं रहा, बस चमत्कार का ठेका किसके पास है, यही असली खबर है। कभी यहां चुंगी नाका पर पत्रकार पाठशाला चलती थी- जहां कलम की नोक पर खबरें नाचती थीं और दिग्गज पत्रकारों का आना-जाना ऐसा था …

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“अधिकारी जी और एपीओ की दिवाली”…

“अधिकारी जी और एपीओ की दिवाली”… मालजी की नगरी का भी क्या कहना..? देखिए ना इस बार सावन-भादो में भी दीपावली मन गई। कारण ? न कोई त्योहार, न सरकारी बोनस बस एक अफवाह! अफवाह ये कि अधिकारी जी को एपीओ कर दिया गया है। अब, मालजी की नगरी के …

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“रामराज्य 2.0: गड्ढों में विकास, अफसरों में अहंकार”

“रामराज्य 2.0: गड्ढों में विकास, अफसरों में अहंकार” रामराज्य की रील, रियल में गड्ढों का खेल! कभी सुना था कि रामराज्य में जनता सुखी होती है, राजा न्यायप्रिय और सेवक स्वाभिमानी। लेकिन आज जो रामराज्य चल रहा है, उसमें अफसर ही राजा हैं, नेता “नजरबंद महापुरुष” हैं, और पत्रकार अगर …

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