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मालपुरा के ऐतिहासिक तालाब उपेक्षा के शिकार ?
मालपुरा (टोंक)। राजस्थान में विश्व पर्यावरण दिवस पर राज्य सरकार ने जल संरक्षण अभियान की जोरदार शुरुआत की थी। अभियान का उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार, भूजल पुनर्भरण और नहरों-बांधों की मरम्मत को बढ़ावा देना बताया गया था। लेकिन हकीकत में मालपुरा शहर इस दिशा में पूरी तरह उपेक्षित नजर आ रहा है।
शहर के ऐतिहासिक ब्रह्म सरोवर और झालरा तालाब स्थानीय पालिका प्रशासन की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण बदहाली के शिकार हैं। इन जलाशयों के जीर्णोद्धार और सौंदर्गीकरण को लेकर घोषणाएं तो कई बार हुईं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। आज स्थिति यह है कि शहर का दूषित व गंदा पानी सीधे इन तालाबों में छोड़ा जा रहा है। नतीजतन तालाब बदबूदार हो चुके हैं और जलीय जीव-जंतुओं का अस्तित्व संकट में है। कभी शहरवासियों की प्यास बुझाने वाले ये सरोवर अब गंदे पानी के ढेर बनकर रह गए हैं। झालरा तालाब की पाल पर अतिक्रमण कर जगह-जगह गोबर के ढेर जमा हैं। वहीं ब्रह्म सरोवर में शौचालयों का गंदा पानी छोड़े जाने से हालात और गंभीर हो गए हैं। एक ओर केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की भजनलाल सरकार जल व पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताती हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन की उपेक्षा से शहर के ऐतिहासिक तालाब और मैदान बदहाली की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में टोडारायसिंह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और स्थानीय विधायक व जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने केंद्र की मोदी सरकार की पर्यावरण संरक्षण नीति के अनुसार 1 घण्टे में 60 हजार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। वहीं मालपुरा शहर में जल व पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नही उठाया गया।
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